गुरु पूर्णिमा
करती हूँ अर्पण, सादर, सप्रेम नमन - प्रफुल्लित सी नतमस्तक हूँ, हैं सम्मुख गुरु चरण। प्रथम प्रणाम जीवन के प्रथम गुरूओं को, अर्पित है सप्रेम नमस्कार, आदरणीय मातु-पितु को। तत्पश्चात करती हूँ आह्वान उन सभी शिक्षकों का, जिन्होंने दिया ज्ञान, बताया सही अर्थ इस जीवन का। मैंने सीखा कि उचित क्या है और क्या अनुचित, व बनी समर्थ कि चुन पाऊँ वो विकल्प जिसमें हो सर्वहित। अभिवादन है उनका भी जिन्होंने कराया मुझसे संघर्ष, अग्निपथ पर ही चलकर होगा मेरा उद्भव उत्कर्ष। वो ज्ञान भी है अनमोल जो प्राप्त हुआ जब पायी हार, क्यूँकि हार में ही छुपी हुई है रहस्यमयी जयजयकार! यही मार्गदर्शन मिला मुझे अपने जीवन में, सदा भरो हृदय में साहस और आशा अपने मन में। गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व, अनमोल है यह अवसर - करूँ प्रकट मैं अनंत आभार, धरकर ध्यान में सभी गुरुवर!